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उमर खालिद का जीवन परिचय (Umar Khalid Biography in Hindi)

उम्र: 38 वर्ष
पेशा: सामाजिक कार्यकर्ता
राष्ट्रीयता: भारतीय
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सुधार का अनुरोध: उमर खालिद

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उमर खालिद एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्ता, पूर्व JNU छात्र नेता हैं। 2016 के JNU राजद्रोह विवाद और 2019–20 के CAA विरोधी आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने के बाद उन्हें सितंबर 2020 में UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत गिरफ्तार किया गया। तब से वो बिना मुकदमे के तिहाड़ जेल में बंद हैं और उनका मामला अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों के लिए एक बड़ा विषय बना हुआ है।

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उमर खालिद के बारे में संक्षिप्त जानकारी

विवरणजानकारी
पूरा नामसैयद उमर खालिद
जन्म तिथि11 August 1987
उम्र 38 वर्ष
पेशासामाजिक कार्यकर्ता
जन्म स्थानजामिया नगर, नई दिल्ली, भारत
गृहनगरजामिया नगर, दिल्ली
धर्मइस्लाम (जन्म से); व्यक्तिगत विचारधारा धर्मनिरपेक्ष-मार्क्सवादी
राष्ट्रीयताभारतीय
रिश्ते की स्थितिअविवाहित

परिवार

सदस्यविवरण
पितासैयद क़ासिम रसूल इलियास (वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष; पूर्व SIMI सदस्य, 1985 में छोड़ी)
मातापश्चिमी उत्तर प्रदेश से; नाम सार्वजनिक नहीं
साथी (Partner)बनोज्योत्स्ना लाहिड़ी (शोधार्थी व कार्यकर्ता; 2008 में मिले, 2013 से संबंध)
Umar Khalid Parents

शिक्षा

स्तरसंस्थानविवरण
स्नातक (B.A.)किरोड़ी मल कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालयइतिहास में स्नातक
स्नातकोत्तर (M.A.)जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU)आधुनिक इतिहास, 2009–2011
M.Phil.JNUआधुनिक इतिहास, 2011–2013
Ph.D.JNUझारखंड के आदिवासी इतिहास पर शोध, 2019 में पूर्ण

उमर खालिद की पृष्ठभूमि

प्रारंभिक जीवन

उमर खालिद का जन्म और पालन-पोषण दक्षिण दिल्ली के जामिया नगर में हुआ — एक सांस्कृतिक रूप से समृद्ध लेकिन राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील इलाके में। बचपन से ही समाज की विषमताओं को करीब से देखने का मौका मिला। 2008 में बटला हाउस मुठभेड़ के बाद उनके पड़ोस के युवाओं और जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्रों पर जो संदेह की नज़र पड़ी, उसने उनके जीवन पर गहरा प्रभाव डाला।

इसी अनुभव ने उन्हें मुख्यधारा की नौकरी की बजाय सामाजिक इतिहास और छात्र सक्रियता की राह चुनने पर मजबूर किया। उन्होंने JNU में आधुनिक इतिहास की पढ़ाई की और झारखंड के आदिवासी समाज पर अपना शोध-कार्य पूरा किया। इतिहासकार रामचंद्र गुहा ने उनके शोध प्रबंध को किसी भारतीय द्वारा लिखे “सबसे श्रेष्ठ डॉक्टरल शोधों में से एक” बताया।

पारिवारिक पृष्ठभूमि

उमर के पिता सैयद क़ासिम रसूल इलियास मूलतः महाराष्ट्र के अमरावती ज़िले से हैं और परिवार लगभग 35 साल पहले दिल्ली आया। वो वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया (Welfare Party of India) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उनके पिता पर अक्सर SIMI से पुराने जुड़ाव को लेकर सवाल उठाए गए — हालांकि उन्होंने 1985 में ही SIMI छोड़ दी थी, जो SIMI पर प्रतिबंध लगने से 16 साल पहले और उमर के जन्म से भी पहले की बात है।

माता पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हैं और परिवार ने उनकी लंबी कैद के दौरान उनका भरपूर साथ दिया है। उमर की साथी बनोज्योत्स्ना लाहिड़ी नियमित रूप से तिहाड़ जेल जाकर कांच की दीवार के आर-पार उनसे मिलती हैं।

करियर

उमर खालिद ने JNU में डेमोक्रेटिक स्टूडेंट्स यूनियन (DSU) से जुड़कर छात्र राजनीति में कदम रखा और जल्द ही लैंगिक न्याय, जाति भेदभाव और कश्मीर मुद्दों पर अपनी आवाज़ बुलंद की। फरवरी 2016 में JNU राजद्रोह विवाद के दौरान वो एक राष्ट्रीय चर्चित चेहरा बन गए, जब उन पर राष्ट्र-विरोधी नारों का आरोप लगा। बाद की जांच में पाया गया कि उनके खिलाफ प्रसारित कई वीडियो क्लिप संपादित थे।

2017 में उन्होंने “यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (United Against Hate)” अभियान की सह-स्थापना की जो उत्तर भारत में भीड़ हिंसा और नफरती अपराधों को दस्तावेज़ीकृत करता था। 2019–20 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) और प्रस्तावित राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शनों में वो एक प्रमुख वक्ता बने। 13 September 2020 को उन्हें UAPA के तहत गिरफ्तार किया गया और तब से वो बिना मुकदमे के तिहाड़ जेल में हैं। 5 January 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उनकी ज़मानत याचिका खारिज कर दी। 

नेट वर्थ (2026 तक)

उमर खालिद का वित्तीय प्रोफाइल बेहद सादा है। उनके पास कोई संपत्ति, व्यावसायिक निवेश या कॉर्पोरेट आय का स्रोत नहीं था। शोध के दौरान विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की फेलोशिप उनकी प्राथमिक आय थी। उनकी कानूनी लड़ाई नागरिक समाज संगठनों, प्रो-बोनो वकीलों और परिवार के सहयोग से लड़ी जा रही है।

उमर खालिद के बारे में कुछ और जानकारियां

  • 2018 में नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बाहर उन पर हत्या का प्रयास हुआ — एक अज्ञात हमलावर ने पिस्तौल से हमला किया, लेकिन वो और उनके साथी हमलावर को दबोचने में सफल रहे। बाद में दो संदिग्धों को हरियाणा से गिरफ्तार किया गया।
  • उनके PhD शोध प्रबंध पर आधारित एक पीयर-रिव्यूड शोध लेख Social Scientist जर्नल में 2018 में प्रकाशित हुआ — विषय था: सिंहभूम में 1830–1897 के बीच ब्रिटिश शासन के दौरान आदिवासी ग्राम अधिकारसत्ता का रूपांतरण।
  • “यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (United Against Hate)” अभियान की स्थापना 2017 में उन्होंने कार्यकर्ता नदीम खान के साथ मिलकर की थी, जो उत्तर भारत में गो-रक्षा के नाम पर होने वाली भीड़ हिंसा को दर्ज करता और कानूनी चुनौती देता था।
  • सुप्रीम कोर्ट ने 5 January 2026 को ज़मानत अस्वीकार करते हुए उन्हें षड्यंत्र में “केंद्रीय और वास्तुकारीय भूमिका (Architectural Role)” वाला बताया — जबकि 5 अन्य सह-अभियुक्तों को उसी दिन ज़मानत दे दी गई।
  • May 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने खुद अपने जनवरी 2026 के उस फैसले की आलोचना की जिसमें उनकी ज़मानत रद्द की गई थी — और UAPA में ज़मानत से जुड़े असंगत प्रावधानों की समीक्षा के लिए एक बड़ी पीठ को मामला सौंपा। यह विडंबना पूरे देश में चर्चा का विषय बनी।
  • एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) ने जनवरी 2026 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले को “शर्मनाक (Shameful)” करार दिया।
  • अंतर्राष्ट्रीय न्यायविद आयोग (ICJ), FIDH और ह्यूमन राइट्स फाउंडेशन (HRF) सहित कई अंतर्राष्ट्रीय संगठनों ने उनकी तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग की है।
  • द गार्जियन (The Guardian) ने उन्हें “भारत का सबसे प्रमुख राजनीतिक कैदी (India’s Most Prominent Political Prisoner)” बताया। 
  • उनके मामले में 1.1 करोड़ पन्नों का अभियोजन दस्तावेज़ दाखिल किया गया है — जो स्वयं में मुकदमे की धीमी रफ्तार का एक बड़ा कारण है।
  • जिस भाषण को अभियोजन पक्ष ने सबूत बनाया, वो 17 February 2020 को अमरावती में दिया गया था — जांच में पाया गया कि उस क्लिप को संदर्भ से बाहर काटकर प्रसारित किया गया था; पूरे भाषण में शांतिपूर्ण संवैधानिक प्रतिरोध की अपील थी।
  • उनके मामले को “ट्रायल बाय जेल (Trial by Jail)” यानी बिना मुकदमे के जेल को ही सज़ा बनाने की प्रवृत्ति का प्रतीक माना जा रहा है — जो भारत में UAPA कानून के दुरुपयोग पर व्यापक बहस का आधार बना है।

रेफरेंस लिंक

  1. https://www.aljazeera.com/news/2026/1/5/delhi-riots-case-why-wont-india-release-umar-khalid-and-sharjeel-imam
  2. https://www.theguardian.com/world/2025/sep/20/umar-khalid-five-years-in-jail-without-trial-india
  3. https://www.bbc.com/news/articles/cd0ye2z33x9o
  4. https://hrf.org/latest/umar-khalid-and-the-erosion-of-indian-justice/
  5. https://www.jurist.org/news/2026/05/india-dispatch-supreme-court-weighs-anti-terror-law-as-activist-enters-sixth-year-jailed-without-trial/

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