तीजन बाई (Teejan Bai) छत्तीसगढ़ की एक महान लोक गायिका और पांडवानी की सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादक थीं — वो एक ऐसी कला परंपरा जो महाभारत की कथाओं को छत्तीसगढ़ी बोली में गायन और नाट्य के माध्यम से प्रस्तुत करती है। पद्म श्री, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित तीजन बाई ने पांडवानी को गाँव की गलियों से निकालकर अंतर्राष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाया। एक नाबालिग लड़की की जबरन शादी, आदिवासी समाज द्वारा बहिष्कार और घोर गरीबी से लड़ते हुए उन्होंने अपनी आवाज़ को ही अपना हथियार बनाया। 5 July 2026 को 69 वर्ष की आयु में रायपुर के AIIMS में उनका निधन हो गया — भारतीय लोक संस्कृति के एक स्वर्णिम अध्याय का अंत।
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तीजन बाई के बारे में संक्षिप्त जानकारी
| विवरण | जानकारी |
| पूरा नाम | तीजन बाई |
| जन्म तिथि | 8 August 1956 (कुछ अभिलेखों में 24 April 1956) |
| निधन तिथि | 5 July 2026 |
| उम्र (निधन के समय) | 69 वर्ष |
| पेशा | पांडवानी गायिका, लोक कलाकार, सांस्कृतिक दूत |
| जन्म स्थान | अटारी गाँव, पटन तहसील, दुर्ग जिला, मध्यप्रदेश (अब छत्तीसगढ़) |
| गृहनगर | गनियारी गाँव, दुर्ग जिला, छत्तीसगढ़ |
| निधन स्थान | AIIMS, रायपुर, छत्तीसगढ़ |
| धर्म | हिंदू |
| जाति/जनजाति | पारधी अनुसूचित जनजाति |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
शारीरिक बनावट
| विवरण | माप/विवरण |
| ऊंचाई | लगभग 5 फीट 5 इंच (अनुमानित) |
| आंखों का रंग | गहरा भूरा (मंच पर भावनाओं की अभिव्यक्ति का माध्यम) |
| बालों का रंग | काला |
| मंच की विशिष्ट पहचान | चमकदार छत्तीसगढ़ी लाल या पीली साड़ी, भारी आदिवासी आभूषण, लाल बिंदी और मोर-पंखों से सजा तंबूरा |
परिवार
| सदस्य | विवरण |
| पिता | चुनुक लाल पारधी |
| माता | सुखवती पारधी |
| नाना | बृजलाल पारधी |
| पहले पति | 12 वर्ष की आयु में बाल विवाह; 13 वर्ष में भागकर कला चुनी; बाद में तलाक |
| बाद के विवाह | तुक्का राम सहित कई और विवाह |
| बहू | वेणु देशमुख |
शिक्षा
| स्तर | विवरण |
| बचपन की शिक्षा | कोई औपचारिक शिक्षा नहीं — घोर गरीबी और जनजातीय परिस्थितियों के कारण |
| वयस्क साक्षरता | स्थानीय कार्यक्रम से कक्षा 5 तक पढ़ना-लिखना सीखा |
| मानद डॉक्टरेट | बिलासपुर विश्वविद्यालय से D.Litt. (2003) सहित चार विश्वविद्यालयों से मानद उपाधि |
तीजन बाई की पृष्ठभूमि
प्रारंभिक जीवन
तीजन बाई का जन्म छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के अटारी गाँव में एक खानाबदोश पारधी जनजाति के परिवार में हुआ। उनकी माँ सुखवती ने उनका नाम “तीजन” इसलिए रखा क्योंकि उनका जन्म तीजा त्योहार के दिन हुआ था — यानी उनकी पहचान ही उनकी मिट्टी की संस्कृति से जुड़ी थी। परिवार बाद में गनियारी गाँव आकर बस गया, जो भिलाई के निकट था।
बचपन में न स्कूल था, न भरपेट खाना, न खेलने की जगह। लेकिन नाना बृजलाल पारधी के मुँह से महाभारत की छत्तीसगढ़ी कथाएं सुनते-सुनते उनके मन में एक अलग ही दुनिया बन गई। वो चोरी-छिपे ये कथाएं सुनती थीं और हज़ारों छंद अपनी स्मृति में संजो लेती थीं — बिना एक शब्द लिखे, बिना एक किताब पढ़े। उनकी माँ सुखवती ने बेटी के सार्वजनिक गायन का कड़ा विरोध किया — कभी कमरे में बंद किया, कभी खाना नहीं दिया — क्योंकि यह जनजातीय मर्यादाओं के खिलाफ था। लेकिन तीजन बाई नहीं रुकीं।

पारिवारिक पृष्ठभूमि
तीजन बाई के पिता चुनुक लाल पारधी शिकार और हस्तशिल्प से परिवार का पेट पालते थे। घर में हमेशा आर्थिक तंगी रहती थी। नाना बृजलाल ने उन्हें महाभारत की कथाओं से परिचित कराया — वो ही उनके पहले और सबसे प्रभावशाली गुरु थे। नाना ने सबल सिंह चौहान द्वारा लिखित छत्तीसगढ़ी महाभारत का पाठ उन्हें कंठस्थ कराया।
12 वर्ष की आयु में परंपरा के अनुसार उनका बाल विवाह करा दिया गया। लेकिन ससुराल वालों ने गायन बंद करने की शर्त रखी। तीजन बाई ने मना कर दिया — 13 वर्ष की उम्र में घर छोड़ा, पारधी पंचायत ने उन्हें जनजाति से बाहर कर दिया। उन्होंने खुद मिट्टी का घर बनाया, पड़ोसियों से उधार बर्तन माँगकर काम चलाया — और गाती रहीं।
करियर
13 वर्ष की आयु में चंद्रखुरी गाँव में 10 रुपये की मेहनताना पर पहला सार्वजनिक प्रदर्शन किया — और वो भी कापालिक शैली में खड़े होकर, जो पुरुषों का एकाधिकार मानी जाती थी। स्त्रियों के लिए केवल वेदमती शैली — यानी बैठकर गाना — उचित माना जाता था। तीजन बाई ने यह भेद तोड़ा। उन्हें सामाजिक प्रतिरोध, अपमान और कभी-कभी शारीरिक दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा — फिर भी वो नहीं झुकीं।
नाट्य निर्देशक हबीब तनवीर की नज़र उनकी प्रतिभा पर पड़ी और उन्होंने तीजन बाई को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समक्ष प्रस्तुत किया — यह वो मोड़ था जिसने उनके जीवन की दिशा बदल दी। इसके बाद वो भारत सरकार की सांस्कृतिक दूत बनीं और फ्रांस, इंग्लैंड, जर्मनी, स्विट्ज़रलैंड सहित दर्जनों देशों में पांडवानी का परचम लहराया। 1988 में श्याम बेनेगल की ऐतिहासिक दूरदर्शन सीरीज “भारत एक खोज” के एपिसोड 5 में उनका प्रदर्शन करोड़ों दर्शकों तक पहुँचा।
वो भिलाई स्टील प्लांट में 30 से अधिक वर्षों तक नौकरी भी करती रहीं — ताकि उनकी कला की स्वतंत्रता पर आर्थिक निर्भरता का दबाव न पड़े।

नेट वर्थ (2026 तक)
| स्रोत | विवरण |
| भिलाई स्टील प्लांट पेंशन | 30+ वर्ष की सेवा का नियमित पेंशन |
| राज्य सांस्कृतिक अनुदान | प्रदर्शन मानदेय और अंतर्राष्ट्रीय दौरे |
| पुस्तक व संगीत रॉयल्टी | पांडवानी रिकॉर्डिंग और प्रकाशन |
| पेंशन विलंब विवाद | अंतिम वर्षों में सरकारी पेंशन रुकी — मीडिया दबाव के बाद जिला प्रशासन से ₹50,000 की आपातकालीन सहायता मिली |
| नेट वर्थ (2026 तक) | मध्यमवर्गीय; दुर्ग में आवासीय संपत्ति और पेंशन निधि |
तीजन बाई के बारे में कुछ और जानकारियां
- उनका नाम “तीजन” इसलिए रखा गया क्योंकि वो तीजा त्योहार के दिन पैदा हुईं — उनकी पहचान उनकी माटी की संस्कृति में ही निहित थी।
- कोई औपचारिक शिक्षा न होने के बावजूद उन्होंने महाभारत के हज़ारों छंद केवल सुनकर कंठस्थ कर लिए — यह मौखिक परंपरा की असाधारण शक्ति का प्रमाण है।
- उनका तंबूरा मंच पर सिर्फ संगीत वाद्य नहीं था — यह भीम का गदा, अर्जुन का धनुष, कृष्ण की बाँसुरी और द्रौपदी के खुले केश बन जाता था — कहानी के अनुसार वो उसे रूप बदलते थीं।
- द्रौपदी चीरहरण और दुःशासन वध उनके सबसे प्रसिद्ध प्रदर्शन थे — जिनमें उनकी गहरी, गर्जना-सी आवाज़ और पूरे शरीर की अभिव्यक्ति दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती थी।
- उन्होंने अपने जीवनकाल में 200 से अधिक बच्चों को पांडवानी सिखाई, ताकि यह परंपरा अगली पीढ़ी तक पहुँचे।
- नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ दौरे पर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली — इसके बाद जिला प्रशासन तत्काल उनके घर पहुँचा। यह घटना उनकी राष्ट्रीय महत्ता का प्रमाण है।
- 27 May 2026 को AIIMS रायपुर में भर्ती हुईं — सेप्सिस और एक्यूट किडनी इंजरी जैसी जटिलताओं से लड़ती रहीं। 5 July 2026 को निधन हो गया।
- जापान के फुकुओका आर्ट्स एंड कल्चर प्राइज़ (Fukuoka Arts and Culture Prize, 2018) से सम्मानित होने वाली वो एकमात्र भारतीय लोक कलाकार हैं।
- उनकी कहानी बाल साहित्य में भी जीवंत है — लावण्या कार्तिक द्वारा लिखित पुस्तक “The Girl Who Loved to Sing” उनके प्रारंभिक जीवन को बच्चों तक पहुँचाती है।
रेफरेंस लिंक
- https://www.thehindu.com/news/national/pandavani-legend-teejan-bai-dies-at-70/article71185044.ece
- https://news.abplive.com/videos/news/india-breaking-news-padma-vibhushan-pandavani-artist-teejan-bai-passes-away-1854563/amp
- https://www.jagran.com/news/national-chhattisgarh-pm-modi-asked-about-teejan-bai-health-update-doctors-team-reached-her-home-40025706.html
- https://www.amarujala.com/chhattisgarh/pandavani-singer-padma-vibhushan-teejan-bai-s-health-deteriorates-admitted-to-icu-of-raipur-aiims-2026-03-12
- https://en.wikipedia.org/wiki/Teejan_Bai











