पारुल चौधरी (Parul Chaudhary) उत्तर प्रदेश के मेरठ से एक भारतीय लंबी दूरी की धाविका हैं जो 3000 मीटर स्टीपलचेज़ (Steeplechase) और 5000 मीटर दौड़ में विशेषज्ञ हैं। गन्ने के खेतों में नंगे पाँव दौड़ने से शुरू हुआ उनका सफर 2023 एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक, राष्ट्रीय रिकॉर्ड और उत्तर प्रदेश पुलिस में DSP के पद तक पहुँचा।
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पारुल चौधरी के बारे में संक्षिप्त जानकारी
| विवरण | जानकारी |
| पूरा नाम | पारुल चौधरी |
| जन्म तिथि | 15 April 1995 |
| उम्र | 31 वर्ष |
| पेशा | एथलीट |
| जन्म स्थान | इकलौता गाँव, मेरठ के पास, उत्तर प्रदेश |
| गृहनगर | इकलौता, मेरठ, उत्तर प्रदेश |
| धर्म | हिंदू |
| जाति | जाट |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| रिश्ते की स्थिति | अविवाहित |
शारीरिक बनावट
| विवरण | माप |
| ऊंचाई | लगभग 1.65–1.70 मीटर (5 फीट 5 इंच) |
| वज़न | लगभग 50–53 kg (प्रतिस्पर्धा भार) |
| आंखों का रंग | गहरा भूरा |
| बालों का रंग | काला |
परिवार
| सदस्य | विवरण |
| पिता | कृष्णपाल चौधरी (किशनलाल चौधरी) |
| माता | राजेश देवी — गृहिणी |

शिक्षा
| स्तर | विवरण |
| प्राथमिक/माध्यमिक | मेरठ जिले के स्थानीय विद्यालय; 2011 से स्कूल स्तरीय खेल प्रतियोगिताएं |
| सर्वोच्च योग्यता | सरकारी सेवा (खेल कोटे) के लिए आवश्यक शैक्षणिक योग्यता |
पारुल चौधरी की पृष्ठभूमि
प्रारंभिक जीवन
पारुल चौधरी का बचपन उत्तर प्रदेश के मेरठ के पास इकलौता गाँव में गन्ने की खेती करने वाले एक सामान्य किसान परिवार में बीता। गाँव में न कोई सिंथेटिक ट्रैक था, न पेशेवर कोच, और न ही प्रशिक्षण के लिए उचित जूते। बचपन में वो गाँव की कच्ची पगडंडियों और गन्ने के खेतों के बीच नंगे पाँव दौड़ती थीं — यही उनकी पहली “ट्रेनिंग” थी।
2011 में एक स्कूल खेल दिवस पर पिता के सुझाव पर उन्होंने 800 मीटर दौड़ में हिस्सा लिया। नंगे पाँव दौड़ते हुए उनकी स्वाभाविक गति और सहनशक्ति ने स्थानीय शारीरिक शिक्षा शिक्षकों का ध्यान आकर्षित किया। धीरे-धीरे उन्होंने 800 मीटर और 1500 मीटर से बढ़कर 3000 मीटर, 5000 मीटर और 3000 मीटर स्टीपलचेज़ को अपनी विशेषता बना लिया।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
पारुल के पिता कृष्णपाल चौधरी गन्ने की खेती करते हैं। माता राजेश देवी ने गृहिणी के रूप में परिवार को आर्थिक तंगी के दौर में भी संभाला। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक ऐसे इलाके में जहाँ लड़कियों के लिए खेल में करियर बनाना असामान्य माना जाता था, पारुल के परिवार ने उन्हें पूरा समर्थन दिया।
एक बहन के साथ शुरुआती स्कूल दौड़ों में भाग लिया — इस सहयोग ने उनकी प्रतिस्पर्धी भावना को शुरू से निखारा। परिवार का यह साहस पारुल की सबसे बड़ी प्रेरणा है, जिसके लिए वो सार्वजनिक रूप से बार-बार आभार व्यक्त करती हैं।

करियर
2015 में पारुल ने खेल कोटे के तहत वेस्टर्न रेलवे (Western Railway) में टिकट कलेक्टर के पद पर नौकरी हासिल की — यह उनके जीवन का पहला बड़ा मोड़ था। इससे उन्हें वित्तीय स्थिरता, आधुनिक प्रशिक्षण और नियमित प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर मिला। 2019 में दोहा एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 5000 मीटर में कांस्य पदक जीतकर अंतर्राष्ट्रीय पहचान मिली।
2023 का साल उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ रहा। बैंकाक में एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में स्वर्ण और 5000 मीटर में रजत पदक जीता। बुडापेस्ट विश्व चैंपियनशिप में 9:15.31 के राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ फाइनल में जगह बनाई और पेरिस 2024 ओलंपिक के लिए सीधा क्वालीफाई किया।
हांगझू एशियाई खेलों में 5000 मीटर का स्वर्ण पदक तो उन्होंने अंतिम 50 मीटर में जापान की प्रतिद्वंद्वी को पछाड़कर जीता — यह पल भारतीय एथलेटिक्स की सबसे यादगार जीतों में से एक बन गया। 27 January 2024 को उन्हें उत्तर प्रदेश पुलिस में DSP (Deputy Superintendent of Police) नियुक्त किया गया और मुरादाबाद में तैनात किया गया। 14 June 2026 को फ्रांस के नीस में Meeting Nikaïa में 15:04.26 का समय निकालकर उन्होंने 5000 मीटर का नया राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया।
नेट वर्थ (2026 तक)
| स्रोत | विवरण |
| उत्तर प्रदेश सरकार पुरस्कार | ₹4 करोड़ (हांगझू एशियाई खेलों में स्वर्ण व रजत पदक के लिए) |
| DSP वेतन (UP पुलिस) | श्रेणी-1 राजपत्रित अधिकारी का वेतनमान |
| अर्जुन पुरस्कार मानदेय | ₹20,000 प्रति माह (खेल मंत्रालय) |
| REC Limited प्रायोजन | अंतर्राष्ट्रीय प्रशिक्षण, Colorado Springs उच्च ऊँचाई शिविर |
| Inspire Institute of Sport | खेल विज्ञान, फिज़ियोथेरेपी, पोषण सहायता |
पारुल चौधरी के बारे में कुछ और जानकारियां
- गन्ने के खेतों की संकरी कच्ची पगडंडियों पर नंगे पाँव दौड़ना उनका पहला प्रशिक्षण था — यही सहनशक्ति आगे जाकर स्टीपलचेज़ बाधाओं को पार करने में काम आई।
- हांगझू एशियाई खेलों में 5000 मीटर फाइनल के अंतिम 50 मीटर में जापान की धाविका को पछाड़कर जीता — यह रणनीतिक अंत में विस्फोटक स्प्रिंट भारतीय एथलेटिक्स इतिहास के सबसे रोमांचक क्षणों में से एक है।
- July 4, 2022 को लॉस एंजेलिस में 8:57.19 का समय निकालकर 3000 मीटर में 9 मिनट से कम समय लेने वाली पहली भारतीय महिला बनीं।
- Forbes India 30 Under 30 (2024) की सूची में खेल श्रेणी में शामिल हुईं।
- पूर्व अफ्रीकी धाविकाओं से मुकाबले के लिए अमेरिका के Colorado Springs में उच्च ऊँचाई प्रशिक्षण शिविर में 107 दिन बिताए — यहाँ ऑक्सीजन की कमी शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाती है।
- 2025 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप (गुमी, दक्षिण कोरिया) में 3000 मीटर स्टीपलचेज़ में 9:12.46 का राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाते हुए रजत पदक जीता।
- जून 2026 में पहले इंडियन एथलेटिक्स अवार्ड्स समारोह में सर्वश्रेष्ठ महिला एथलीट 2025 का पुरस्कार मिला — इस समारोह में नीरज चोपड़ा जैसे दिग्गज भी शामिल थे।
- खेल और सरकारी सेवा का दुर्लभ संयोजन — एक तरफ अंतर्राष्ट्रीय ट्रैक पर दौड़ती हैं, दूसरी तरफ मुरादाबाद में DSP के रूप में प्रशासनिक कर्तव्य निभाती हैं।
- REC Limited के ₹100 करोड़ के खेल विकास कोष से प्रायोजित होने वाली चुनिंदा भारतीय एथलीटों में शामिल हैं।
- स्कूल स्तर पर पहली दौड़ में जूते भी नहीं थे — राज्य स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में चयन के बाद ही पहली बार पेशेवर रनिंग स्पाइक्स (Running Spikes) मिले।
रेफरेंस लिंक
- https://www.olympics.com/en/news/parul-chaudhary-national-record-5000m-meeting-nikaia-2026-athletics
- https://www.indiatoday.in/sports/athletics/story/neeraj-chopra-parul-chaudhary-best-athletes-afi-awards-2026-2930763-2026-06-20
- https://www.olympics.com/en/news/asian-athletics-championships-2025-gumi-day-4-india-report
- https://indianexpress.com/article/sports/parul-chaudhary-national-record-5000m-france-cwg-qualification-10738610/
- https://sports.ndtv.com/olympics-2024/parul-chaudhary-finishes-8th-in-3000m-steeplechase-heat-race-fails-to-qualify-for-final-round-6260446
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