सी.ए. भवानी देवी (C. A. Bhavani Devi) तमिलनाडु के चेन्नई से एक भारतीय तलवारबाज़ हैं। वो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाली पहली भारतीय फेंसर हैं जिन्होंने टोक्यो 2020 ओलंपिक में इतिहास रचा। 12 राष्ट्रीय चैंपियनशिप खिताब और कॉमनवेल्थ गोल्ड समेत कई अंतर्राष्ट्रीय पदक जीतकर उन्होंने भारत में तलवारबाज़ी को एक नई पहचान दी है।
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सी.ए. भवानी देवी के बारे में संक्षिप्त जानकारी
| विवरण | जानकारी |
| पूरा नाम | चदलवाड अनंधा सुंदरारामन भवानी देवी |
| जन्म तिथि | 27 August 1993 |
| उम्र | 32 वर्ष |
| पेशा | अंतर्राष्ट्रीय तलवारबाज़ |
| जन्म स्थान | चेन्नई, तमिलनाडु, भारत |
| गृहनगर | चेन्नई, तमिलनाडु |
| धर्म | हिंदू |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| जाति | ब्राह्मण |
शारीरिक बनावट
| विवरण | माप |
| ऊंचाई | 1.68 मीटर (5 फीट 6 इंच) |
| वज़न | लगभग 58 kg |
| आंखों का रंग | गहरा भूरा |
| बालों का रंग | काला |
परिवार
| सदस्य | विवरण |
| पिता | सी. अनंधा सुंदरारामन (मंदिर के पुजारी; अब स्वर्गवासी) |
| माता | सी.ए. रमणी (गृहिणी; भवानी के करियर की सबसे बड़ी प्रेरणा और आर्थिक समर्थक) |
| बड़े भाई (1) | सुरेश कुमार (निवेश सलाहकार) |
| बड़े भाई (2) | गणेश राम (वकील) |
| बड़ी बहन | रेणुका (वकील) |

शिक्षा
| स्तर | संस्थान |
| माध्यमिक | मुरुगा धनुष्कोडी गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल, चेन्नई |
| स्नातक (B.B.A.) | गवर्नमेंट ब्रेनन कॉलेज (Brennen College), तलस्सेरी, केरल |
| स्नातकोत्तर (M.B.A.) | सेंट जोसेफ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग (St. Joseph’s), चेन्नई |
सी.ए. भवानी देवी की पृष्ठभूमि
प्रारंभिक जीवन
सी.ए. भवानी देवी का बचपन चेन्नई के वॉशरमेनपेट इलाके में एक सामान्य मध्यमवर्गीय परिवार में बीता। 2004 में जब वो कक्षा 6 में गईं तो उन्हें कोई एक खेल चुनना था — वॉलीबॉल और स्क्वैश में सीटें भर चुकी थीं। तलवारबाज़ी ही एकमात्र विकल्प था जो उन्होंने स्कूल की मार्चिंग ड्रिल से बचने के लिए चुना।
शुरुआती प्रशिक्षण बेहद चुनौतीपूर्ण था। इलेक्ट्रॉनिक साज़-सामान न होने के कारण उन्होंने हाथ से काटे गए बाँस की छड़ियों से अभ्यास किया और चेन्नई की कड़ी धूप में कंक्रीट की ज़मीन पर खेला। वॉशरमेनपेट से पेरियामेट तक रोज़ाना लंबी यात्रा करनी पड़ती थी — कभी रात की बस से तो कभी पैदल चलकर।
पारिवारिक पृष्ठभूमि
भवानी के पिता सी. अनंधा सुंदरारामन मंदिर के पुजारी थे — टोक्यो 2020 ओलंपिक से पहले उनका निधन हो गया। उनकी माँ सी.ए. रमणी ने करियर की हर मुश्किल घड़ी में बेटी का साथ दिया। आर्थिक तंगी के दौर में माँ ने परिवार के गहने गिरवी रखे और व्यक्तिगत कर्ज़ लिया ताकि भवानी की अंतर्राष्ट्रीय यात्राएं और प्रशिक्षण खर्च पूरे हो सकें।
बड़े भाई-बहनों ने वित्त और कानून के क्षेत्र में अपना करियर बनाया और इस तरह परिवार ने मिलकर भवानी को यूरोप में प्रशिक्षण के लिए ज़रूरी वित्तीय स्थिरता दी।
करियर
भवानी देवी का अंतर्राष्ट्रीय सफर 2007 में तुर्की में शुरू हुआ, जहाँ होटल से मैदान दूर होने के कारण वो तीन मिनट देर से पहुंचीं और ब्लैक कार्ड मिला — यह कड़वा अनुभव उनके जीवन का सबसे बड़ा सबक बना। 2014 में वो अंडर-23 एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक जीतने वाली पहली भारतीय फेंसर बनीं। 2015 में गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन के राहुल द्रविड़ एथलीट मेंटरशिप प्रोग्राम (Rahul Dravid Athlete Mentorship Programme) में चुनी गईं।
2016 में वो इटली के लिवोर्नो (Livorno) में कोच निकोला ज़ानोटी (Nicola Zanotti) के पास प्रशिक्षण लेने चली गईं। 2018 में ऑस्ट्रेलिया के कैनबरा में कॉमनवेल्थ फेंसिंग चैंपियनशिप में व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतकर वो 44 साल के इतिहास में ऐसा करने वाली पहली भारतीय बनीं। मार्च 2021 में उन्होंने टोक्यो 2020 ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया और भारत की पहली ओलंपिक फेंसर बनीं। 2022 में एशियाई फेंसिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर एक और इतिहास लिखा। जनवरी 2025 में कंधे की चोट के बावजूद दर्द सहते हुए 12वां राष्ट्रीय खिताब जीता।

नेट वर्थ (2026 तक)
| स्रोत | विवरण |
| राज्य सरकार पुरस्कार | तमिलनाडु सरकार; मुख्यमंत्री जयललिता से ₹3 लाख का अनुदान |
| गोस्पोर्ट्स फाउंडेशन | राहुल द्रविड़ मेंटरशिप स्कॉलरशिप; यूरोप में प्रशिक्षण खर्च |
| कॉर्पोरेट प्रायोजन | खेल वस्त्र, पोषण कंपनियां, वित्तीय संस्थाएं |
| SAI राष्ट्रीय समर्थन | राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर एवं टूर्नामेंट प्रवेश शुल्क |
| नेट वर्थ (2026 तक) | सटीक जानकारी सार्वजनिक नहीं |
सी.ए. भवानी देवी के बारे में कुछ और जानकारियां
- फेंसिंग उनकी पहली पसंद नहीं थी — वॉलीबॉल और स्क्वैश में सीटें भरी थीं, इसलिए स्कूल मार्चिंग से बचने के लिए तलवारबाज़ी चुनी और यही उनकी पहचान बन गई।
- शुरुआती प्रशिक्षण में उनके पास असली साबर (Sabre) नहीं थी — बाँस की छड़ियों से अभ्यास करती थीं, कंक्रीट पर चेन्नई की धूप में।
- 2007 में तुर्की में पहली अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में होटल से मैदान दूर था — तीन मिनट की देरी से ब्लैक कार्ड मिला और तुरंत बाहर हो गईं। इस घटना ने उन्हें पेशेवर अनुशासन सिखाया।
- माँ ने बेटी के करियर के लिए परिवार के सोने के गहने गिरवी रखे और उच्च ब्याज दर पर कर्ज लिया — यह त्याग भवानी की सबसे बड़ी प्रेरणा है।
- 2023 में चीन के वुशी (Wuxi) में एशियाई फेंसिंग चैंपियनशिप के क्वार्टरफाइनल में उन्होंने विश्व चैंपियन जापान की मिसाकी एमुरा को 15-10 से हराया — यह भारतीय फेंसिंग के इतिहास का एक यादगार पल था।
- अप्रैल 2024 में पेरिस ओलंपिक क्वालीफायर में हार के बाद उन्होंने रेफरी के विवादास्पद निर्णयों को ज़िम्मेदार ठहराया और खुलकर बेहतर रेफरिंग की मांग की।
- जून-जुलाई 2024 में दाएं कंधे में लैब्रम टियर (Labrum Tear) का पता चला। कुछ डॉक्टरों ने ऑपरेशन की सलाह दी, लेकिन उन्होंने बेंगलुरु में 8 हफ्ते की रिहैब (Rehab) का रास्ता चुना।
- जनवरी 2025 में कंधे की चोट के बावजूद दर्द सहते हुए खेलीं और 12वां राष्ट्रीय खिताब जीता — इसे “दर्द में जीत” के रूप में याद किया जाता है। तमिलनाडु को उस चैंपियनशिप में तीन स्वर्ण पदक दिलाए।
- भारतीय फेंसर के रूप में विश्व में 28वीं रैंकिंग हासिल की — किसी भारतीय फेंसर की अब तक की सर्वश्रेष्ठ वैश्विक रैंकिंग।
- टोक्यो 2020 में राउंड ऑफ 64 में ट्यूनीशिया की नाडिया बेन अज़ीज़ी को 15-3 से हराया — यह भारतीय ओलंपिक फेंसिंग की पहली जीत थी।
- 2021 में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया — यह भारत सरकार की ओर से खेल क्षेत्र में दिया जाने वाला प्रतिष्ठित सम्मान है।
- भारत की एकमात्र ओलंपिक फेंसर होने के साथ-साथ वो कॉमनवेल्थ चैंपियनशिप में 44 साल के इतिहास में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय भी हैं।
रेफरेंस लिंक
- https://timesofindia.indiatimes.com/city/chennai/playing-through-pain-bhavani-devi-becomes-national-champion-once-again/articleshow/116920814.cms
- https://timesofindia.indiatimes.com/sports/more-sports/others/bhavani-devi-blames-referees-after-missing-paris-olympics-cut/articleshow/109679426.cms
- https://www.espn.in/olympics/fencing/story/_/id/31062439/bhavani-devi-becomes-first-indian-fencer-ever-qualify-olympics
- https://www.thehindu.com/sport/other-sports/commonwealth-fencing-championship-bhavani-devi-wins-gold/article25587330.ece
- https://www.globalindian.com/youth/story/cover-story/bhavani-devi-the-fencer-making-history-for-india/
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