भरत सिंह ‘भारती’ बिहार के भोजपुर जिले के रहने वाले एक मशहूर भोजपुरी लोक गायक हैं। इन्होंने पिछले 70 सालों से भी ज़्यादा समय से बिहार के लोक संगीत को जिंदा रखने और उसे सहेजने में अपनी पूरी जिंदगी लगा दी है।
इन्होंने 5,000 से भी ज़्यादा लोकगीत लिखे और गाए हैं। आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) में दशकों तक काम करने और शारदा सिन्हा जैसी महान गायिका को शुरुआती दिनों में मार्गदर्शन देने के बाद, साल 2026 में भारत सरकार ने इन्हें देश के चौथे सबसे बड़े सम्मान — पद्म श्री (Padma Shri) से सम्मानित किया।
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भरत सिंह ‘भारती’ के बारे में संक्षिप्त जानकारी
| विवरण | जानकारी |
| पूरा नाम | भरत सिंह ‘भारती’ |
| जन्म तिथि | 20 November 1936 |
| उम्र | 89 वर्ष |
| पेशा | भोजपुरी लोक गायक, सांस्कृतिक संरक्षक, लेखक |
| जन्म स्थान | ननौर गाँव, भोजपुर जिला, बिहार, भारत |
| गृहनगर | ननौर, भोजपुर, बिहार |
| धर्म | हिंदू |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |


बचपन और संगीत की शुरुआत
भरत जी का जन्म 20 नवंबर 1936 को भोजपुर के ननौर गाँव में एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उस दौर में गाँवों में न बिजली थी और न संगीत सीखने का कोई साधन।
- 10 साल की उम्र: उन्होंने गाँव की कीर्तन मंडलियों में गाना शुरू कर दिया।
- 15 साल की उम्र: आरा के मशहूर तबला और मृदंग वादक शत्रुंजय प्रसाद सिंह ‘लालन जी’ से संगीत और ताल की विधिवत शिक्षा ली।
खास बात: भरत जी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे गाते-गाते खुद ही तबला भी बजाते थे। यह बेहद कठिन कला है, जिसे वे करीब 20 सालों तक मंच पर करते रहे।
आकाशवाणी और पहचान
1962 में पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने आकाशवाणी (पटना) से अपने रेडियो करियर की शुरुआत की। जल्द ही उनकी आवाज़ देश भर के अलग-अलग रेडियो स्टेशनों पर गूंजने लगी।
- उन्होंने भोजपुरी के अलावा मगही, मैथिली, अवधी, हिंदी, बंगाली और तमिल समेत कई भाषाओं में गाया।
- टी-सीरीज़ (T-Series) के साथ उनके कई मशहूर एल्बम आए, जैसे “हौले-हौले डोलिया” और “रुसल देवरा के मनावे”।
शारदा सिन्हा के गुरु और मार्गदर्शक
बहुत कम लोग जानते हैं कि भोजपुरी की महान गायिका शारदा सिन्हा को उनके शुरुआती दिनों में भरत जी ने ही गाइड किया था। मशहूर विवाह गीत “साँवर साँवर सुरतिया तोहर दुलहा” भी भरत जी की ही रचना है, जिसे शारदा सिन्हा जी ने गाकर अमर बना दिया।
भरत सिंह ‘भारती’ से जुड़ी 5 दिलचस्प बातें
- ढेरों वाद्ययंत्रों के उस्ताद: वे सिर्फ गाते ही नहीं हैं, बल्कि हारमोनियम, बाँसुरी, सितार, तबला, ढोलक, नाल और खंजरी जैसे कई बाजे खुद बजा लेते हैं।
- किताबें भी लिखीं: लोकगीतों को सहेजने के लिए उन्होंने “नयका बिहान” (101 लोकगीत) और “सप्त सरोवर” (105 लोकगीत) नाम की किताबें लिखी हैं।
- आज के गानों से दूरी: एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा था कि वे आज के दौर के व्यावसायिक या अश्लील भोजपुरी गाने सुनना पसंद नहीं करते। वे शुद्ध लोक परंपरा के समर्थक हैं।
- कोरोना काल में मदद: कोविड-19 महामारी के दौरान समाज की सेवा और सांस्कृतिक योगदान के लिए बिहार सरकार ने उन्हें “कोरोना कर्मवीर सम्मान” दिया था।
- पारिवारिक जुड़ाव: आज भी उनके पोते भारद्वाज भारती और पोती-बहू रश्मि राय उनके साथ यात्राओं में मदद करते हैं और पद्म श्री समारोह में भी उनके साथ राष्ट्रपति भवन गए थे।
रेफरेंस लिंक
- https://www.jagran.com/bihar/bhojpur-bhojpuri-folk-singer-bharat-singh-bharti-honored-with-padma-shri-40251888.html
- https://www.abplive.com/states/bihar/padam-awards-2026-bhojpuri-folk-legend-bharat-singh-bharti-awarded-padma-shri-from-bihar-3079810
- https://timesofindia.indiatimes.com/city/patna/4-bihar-artists-get-sangeet-natak-akademi-awards/articleshow/103723694.cms
- https://www.tv9hindi.com/state/bihar/who-is-bhojpuri-folk-singer-bharat-singh-bharti-awarded-padma-shri-2026-3663425.html
- https://www.bharatsinghbharti.com/awards
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